Kanwar Lake Begusarai: बिहार में डल झील जैसा आनंद लेना है यहां आइए

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Publish : 14-12-2022 6:59 PM Updated : 14-12-2022 6:59 PM
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बेगूसराय. अगर आप अपने परिवार के साथ नए साल पर जश्न मनाने की सोच रहे हैं तो बेगूसराय का कावर झील आपके लिए बेहद खास हो सकता है. कावर झील को 2019 में केन्द्र सरकार ने जलीय इको सिस्टम संरक्षण के  तहत देश के सौ झीलों में कावर झील को भी शामिल किया था. लेकिन अब कावर झील को रामसर साइट में शामिल कर अंतर्राष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड घोषित कर दिया गया है. बेगूसराय स्थित कावर झील तक पहुंचना बेहद आसान है. यहां आप आसानी से कम बजट में घूम सकते हैं. बेगूसराय ट्रेन नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. यहां आप किसी भी हिस्से से बरौनी जंक्शन आसानी से पहुंच सकते हैं.

 

42 वर्ग किमी में फैली कावर झील

कावर झील बिहार का पहला और भारत का 39 वां रामसर साइट में शामिल है. इस झील को पक्षी विहार का दर्जा 1987 में बिहार सरकार ने दिया था. यह झील 42 वर्ग किलोमीटर (6311 हेक्टेयर) के क्षेत्रफल में फैली  है. इस बर्ड सेंचुरी में 59 तरह के विदेशी पक्षी और 107 तरह के देशी पक्षी ठंड के मौसम में देखे जा हैं. केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी इसकी मॉनिटरिंग करता है.

 

59 प्रजाति के पक्षी आते हैं यहां

कावर (बर्ड संचुरी) में ठंड बढ़ने के साथ ही साइबेरिया, अलास्का, रूस, मंगोलिया सहित सात समुद्र पार कर अन्य देशों से आने वाले मेहमान पक्षी लालसर, दिधौंच, सरायर, कारण, डुमरी, अधंग्गी, बोदइन एवं कोइरा सहित अन्य देशों से करीब 59 प्रजाति के पक्षी आते हैं. प्रवासी पक्षी ठंड शुरू होते ही नवम्बर माह से आना शुरू कर देते हैं. करीब तीन माह के प्रवास के बाद फरवरी मार्च में वापस अपने देश लौट जाते हैं.

 

विदेशी पक्षियों की  सुरक्षा को लेकर इतिहासकार चिंतित

बेगूसराय के इतिहासकार  और कावर झील पर किताब लिखने वाले महेश भारती बताते हैं 2019 में इसे रामसर साइट का दर्जा मिल गया, लेकिन विदेशी पक्षियों के संरक्षण को लेकर कोई विशेष रणनीति नहीं बनाई गई है. पटना और दरभंगा जिलों से पहुंचे पर्यटकों ने बताया कि वह खास तौर से कावर झील देखने के लिए आए हैं. बोटिंग का मजा लेने के बाद विदेशी पक्षी देखने का प्रयास किया, लेकिन नजर नहीं आये. साथ हीं कावर झील की साफ-सफाई को लेकर भी चिंता जाहिर की.

 

मुजफ्फरपुर से आए अनिल कुमार ने बताया कि साइबेरिया के  पक्षी को देखने के लिए वह आए, लेकिन दीदार नहीं हो पाया.स्थानीय नाविक लालो साव बताते हैं नमामि गंगे के तहत कुछ कार्य नहीं हुआ है. सरकार को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है. झील में पानी कम रहने की वजह से इस बार पक्षियों की संख्या भी काफी कम है.

 

कैसे पहुंचे कावर झील

बेगूसराय जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड से कावर झील की दूरी महज 35 किमी है. यहां आने के लिए  बेगूसराय -रोसड़ा मार्ग SH-55 से 25 किमी दूर मंझौल बस या निजी वाहन से भी जा सकते हैं. इसके बाद मंझौल बस स्टैंड से दाएं होते हुए 10 किमी के सफर के बाद आप कावर झील पहुंच सकते हैं.

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