जहां-जहां हिंसा-हत्या, वहां-वहां आया नाम; जानें क्या है PFI, जिस पर कसा है NIA का शिकंजा

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Publish : 02-10-2022 10:31 PM Updated : 04-10-2022 12:57 PM
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नई दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा, दंगा और हत्यायों में जिस एक संगठन का नाम बार-बार आता है, वही विवादित संगठन एक बार फिर चर्चा में आ गया है. पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर अब तक का सबसे बड़ा एक्शन देखने को मिल रहा है और एनआईए यानी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी देश के 11 राज्यों में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े लोगों और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है. इतना ही नहीं, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े 100 से अधिक लोगों को पुलिस की मदद से एजेंसी ने गिरफ्तार भी किया है. बता दें कि पीएफआई का विवादों से बहुत पुराना नाता रहा है और हत्या से लेकर दंगों में इसके नाम आते रहे हैं.

 

कई हिंसा में आ चुका है पीएफआई का नाम
दरअसल, उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक जब भी कोई बड़ा कांड होता है, इसी विवादित संगठन पीएफआई को जिम्मेदार ठहराया जाता है. सीएए प्रोटेस्ट के दौरान शाहीनबाग हिंसा, जहांगीरपुरी हिंसा से लेकर यूपी में कानपुर हिंसा, राजस्थान के करौली में हिंसा, मध्य प्रदेश के खरगौन में हिंसा और कर्नाटक में भाजपा नेता की हत्या, समेत देशभर में कई हिंसा और हत्याओं में इस पीएफआई संगठन का नाम आ चुका है. यही वजह है कि यूपी की योगी सरकार ने तो इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए गृह मंत्रालय को चिट्ठी तक लिख दी थी.

 

विवादों से पुराना है नाता
राजस्थान, मध्य प्रदेश में हिंसा से लेकर यूपी के कानपुर में हुई हिंसा में भी पीएफआई का नाम आया था. इतना ही नहीं, कर्नाटक में हिजाब विवाद और इसके बाद पैदा हुए तनाव के पीछे भी इसी का नाम लिया गया. नागरिकता कानून मामले में भी इस पर जगह-जगह तनाव फैलाने और हिंसा कराने का आरोप लगा. इतना ही नहीं, पटना के फुलवारीशरीफ में साजिश में भी इसका नाम आया था. साल 2016 में इस संगठन पर आरएसएस से जुड़े नेता की हत्या का आरोप लगा था. कई दंगों में भी इस संगठन का नाम आ चुका है. यही वजह है कि समय-समय पर इस संगठन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी होती रही है और इसे बैन करने की मांग होती है.

 

क्या है पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया?
पीएफआई केरल से संचालित होने वाला एक कट्टर इस्लामिक संगठन है, हालांकि, यह खुद को ऐसा नहीं बताता. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया 22 नवंबर 2006 को तीन मुस्लिम संगठनों के मिलने से बना था. इसकी स्थापना कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (KFD), केरल के नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) और तमिलनाडु के मनिता नीति पसरई (MNP) के एक संघ के रूप में की गई थी. पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया खुद को मुसलमानों के साथ-साथ वंचितों के हक में आवाज उठाने और उन्हें सशक्त बनाने वाला संगठन बताता है. इसका मुख्यालय दिल्ली में है.

 

हत्याओं में भी खूब रहा है इस संगठन का नाम
वैसे तो देश के अब हर हिस्से में पीएफआई की मौजूदगी हो गई है, मगर केरल में पीएफआई की कीफी मजबूत स्थिति है. एनआईए के मुताबिक, देश के 23 राज्यों में पीएफआई की पकड़ है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस संगठन के सदस्य कथित तौर पर कम से कम 27 हत्या के मामलों में शामिल रहे हैं. इनके ऊपर ज्यादातर केरल में सीपीएम और आरएसएस के कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोप हैं. संगठन पर मलप्पुरम और केरल के अन्य जिलों में जबरन धर्म परिवर्तन कराने का भी आरोप लगाया गया है.

 

केरल में हत्या की वजह से तब खूब हुई थी इसकी चर्चा
कर्नाटक और केरल की पुलिस को पीएफआई के ठिकानों में घातक हथियारों के इस्तेमाल के सबूत भी मिले हैं. 2010 में पीएफआई पर आरोप लगा कि इसके सदस्यों ने एक मलयाली प्रोफेसर टी जे जोसेफ का दाहिना हाथ काट डाला था, क्योंकि प्रोफेसर ने पैगंबर पर सवाल उठाए थे. 2012 में केरल की सरकार ने हाईकोर्ट में एक एफिडेविट दी थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि पीएफआई के सदस्यों का सीपीआई(एम) और आरएसएस से जुड़े 27 राजनीतिक हत्याओं में हाथ था. सरकार ने कहा कि ज्यादातर हत्याएं सांप्रदायिक रंग देकर की गई थी. इसके अलावा भी इनकी 86 इसी तरह की हत्याएं करने की योजना थी. ये एफिडेविट कन्नूर में एक एबीवीपी से जुड़े छात्र सचिन गोपाल की हत्या के बाद दी गई थी. इस तरह भले ही यह संगठन भारत में हाशिये पर पड़े वर्गों के सशक्तिकरण के लिए नव सामाजिक आंदोलन चलाने का प्रयास करने का दावा करता है, मगर अब तक की हकीकत इससे उलट है.

 

आज पीएफआई पर क्या शिकंजा कसा
एनआईए यानी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की अगुवाई में कई एजेंसियों ने गुरुवार को सुबह 11 राज्यों में एक साथ छापे मारे और देश में आतंकवाद के वित्त पोषण में कथित तौर पर शामिल पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 106 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया. अधिकारियों ने बताया कि सबसे अधिक गिरफ्तारियां

  1. केरल - 22
  2. महाराष्ट्र - 20
  3. कर्नाटक - 20
  4. तमिलनाडु - 10
  5. असम - 09
  6. उत्तर प्रदेश - 08
  7. आंध्र प्रदेश - 05
  8. मध्य प्रदेश - 04
  9. पुडुचेरी - 03
  10. दिल्ली - 03 और
  11. राजस्थान - 02

में की गईं. एनआईए ने इसे ‘अब तक का सबसे बड़ा जांच अभियान’ करार दिया. एनआईए, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और 11 राज्यों के पुलिस बल ने गिरफ्तारियां की हैं. आतंकवदियों को कथित तौर पर धन मुहैया कराने, उनके लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने और लोगों को प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ने के लिए बरगलाने में कथित तौर पर शामिल व्यक्तियों के परिसरों पर छापे मारे जा रहे हैं.

 

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